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	<title>Comments on: Source of your being</title>
	<link>http://www.bestoutofyou.com/personal-development/44/source-of-your-being/</link>
	<description>Way to have freedom of money, life and mind.</description>
	<pubDate>Mon, 06 Feb 2012 05:18:13 +0000</pubDate>
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		<title>By: swami satyendra madhurya</title>
		<link>http://www.bestoutofyou.com/personal-development/44/source-of-your-being/#comment-19</link>
		<dc:creator>swami satyendra madhurya</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Apr 2008 02:17:38 +0000</pubDate>
		<guid>http://www.bestoutofyou.com/personal-development/44/source-of-your-being/#comment-19</guid>
		<description>एक जबाव चाहिए 
मैकदों के भी आस -पास रही ,
गुल रुखों से भी रूसनास रही ।
जाने क्या बात है किइस पर भी ,
जिंदगी उम्र भर उदास रही ?
मधुशालायें पास थीं , दूर नहीं । सुंदर मुखडों वाले लोग निकट थे, परिचय था उनसे ।---------------------- "मैकदों के भी आस पास रही" , 
शराब भी पी , विस्मरण भी किया , मधुशाला पास ही थी ।
गुलरुखों से भी रूसनास रही
फूल जैसे सुंदर चेहरे वाले व्यक्तित्वों से भी परिचय रहा । मुलाकात रही । मधुशाला में भी विस्मरण किया ; प्रेम में भी डूबे - लेकिन फिर भी कुछ बात ............
"जाने क्या बात है कि इस पर भी, जिन्दगी उम्र भर उदास रही?"
एक सवाल छोड़ रहा हूँ - एक ऐसा सवाल जिसका जवाब अगर मिल जाए ।तो इस् जगत के सारे सारे सवाल भी मिट जायें । केवल एक जवाब चाहिए जो उम्र भर कि उदासी मिटा दे । आप सभी मित्रों से मदद चाहिए , इस एक जवाब को खोजने में । मदद , हेल्प .....................सहायता - तुम्हारा शुभेच्छु ;- स्वामी सत्येन्द्र माधुर्य
लेबल: ह्त्त्प://व्व्व.तत्वाग्यनिन्डिया.ब्लागस्पाट.कॉम</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक जबाव चाहिए<br />
मैकदों के भी आस -पास रही ,<br />
गुल रुखों से भी रूसनास रही ।<br />
जाने क्या बात है किइस पर भी ,<br />
जिंदगी उम्र भर उदास रही ?<br />
मधुशालायें पास थीं , दूर नहीं । सुंदर मुखडों वाले लोग निकट थे, परिचय था उनसे ।&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;- &#8220;मैकदों के भी आस पास रही&#8221; ,<br />
शराब भी पी , विस्मरण भी किया , मधुशाला पास ही थी ।<br />
गुलरुखों से भी रूसनास रही<br />
फूल जैसे सुंदर चेहरे वाले व्यक्तित्वों से भी परिचय रहा । मुलाकात रही । मधुशाला में भी विस्मरण किया ; प्रेम में भी डूबे - लेकिन फिर भी कुछ बात &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;<br />
&#8220;जाने क्या बात है कि इस पर भी, जिन्दगी उम्र भर उदास रही?&#8221;<br />
एक सवाल छोड़ रहा हूँ - एक ऐसा सवाल जिसका जवाब अगर मिल जाए ।तो इस् जगत के सारे सारे सवाल भी मिट जायें । केवल एक जवाब चाहिए जो उम्र भर कि उदासी मिटा दे । आप सभी मित्रों से मदद चाहिए , इस एक जवाब को खोजने में । मदद , हेल्प &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;सहायता - तुम्हारा शुभेच्छु ;- स्वामी सत्येन्द्र माधुर्य<br />
लेबल: ह्त्त्प://व्व्व.तत्वाग्यनिन्डिया.ब्लागस्पाट.कॉम</p>
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